वितरित सौर ऊर्जा: भारत की तीव्र प्रगति और क्रियान्वयन संबंधी चुनौतियाँ
स्वच्छ एवं विकेन्द्रीकृत ऊर्जा (Decentralised Clean Energy) की दिशा में भारत का संक्रमण एक निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका है। वितरित ऊर्जा संसाधनों (Distributed Energy Resources—DER), विशेषकर रूफटॉप सौर ऊर्जा (Rooftop Solar), का उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। इसके बावजूद अनेक संरचनात्मक चुनौतियाँ इसकी वास्तविक क्षमता के पूर्ण उपयोग में बाधा बनी हुई हैं। यही नीति-स्तर की महत्वाकांक्षा और जमीनी क्रियान्वयन के बीच का अंतर भारत की ऊर्जा यात्रा की सबसे बड़ी चुनौती है।
भारत की उल्लेखनीय प्रगति
- भारत की वितरित सौर क्षमता (Distributed Solar Capacity) वित्त वर्ष 2018 के 1.8 गीगावाट से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में 31.5 गीगावाट हो गई है, अर्थात इसमें 17 गुना से अधिक वृद्धि हुई है।
- इस प्रगति का आधार प्रधानमंत्री सूर्य घर : मुफ्त बिजली योजना तथा प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (PM-KUSUM) जैसी प्रमुख योजनाएँ रही हैं। साथ ही CAPEX, RESCO एवं OPEX आधारित विभिन्न व्यावसायिक मॉडल ने शहरी एवं ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में इसकी पहुँच का विस्तार किया है।
- केवल रूफटॉप सौर क्षमता ही 1.1 गीगावाट से बढ़कर 25.7 गीगावाट हो गई, जबकि ऑफ-ग्रिड सौर पंपों की संख्या में लगभग 8 गुना वृद्धि दर्ज की गई।
- देश में 637 गीगावाट की अनुमानित रूफटॉप क्षमता तथा सौरकरण की प्रतीक्षा कर रहे लाखों सिंचाई पंप इस क्षेत्र में व्यापक संभावनाओं का संकेत देते हैं।
- भारत ने व्यापक तकनीकी मानक तथा एकीकृत डिजिटल आवेदन मंच (Unified Digital Application Platform) विकसित कर इस क्षेत्र के संस्थागत ढाँचे को भी सुदृढ़ किया है।
क्रियान्वयन संबंधी चुनौतियाँ
- उल्लेखनीय प्रगति के बावजूद भारत की कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में वितरित सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी लगभग 21–22% पर स्थिर बनी हुई है, क्योंकि यूटिलिटी-स्केल सौर परियोजनाओं का विस्तार इससे भी अधिक तेज़ी से हुआ है।
- परियोजनाओं की स्वीकृति में विलंब आज भी एक प्रमुख समस्या है तथा निर्धारित समय-सीमाओं का प्रायः पालन नहीं हो पाता।
- उपभोक्ताओं को नेट मीटरिंग, बैंकिंग एवं ओपन एक्सेस से जुड़े नियामकीय अनिश्चितताओं का सामना करना पड़ता है। साथ ही किसानों एवं लघु उद्यमों के लिए वित्तपोषण की कमी भी बनी हुई है।
- स्मार्ट मीटरिंग तथा विद्युत ग्रिड की वास्तविक समय निगरानी, जो ग्रिड एकीकरण (Grid Integration) के लिए आवश्यक हैं, अभी भी अधिकांश राज्यों में पर्याप्त रूप से विकसित नहीं हो पाई हैं।
आगे की राह
इन चुनौतियों के समाधान के लिए नेट मीटरिंग नियमों का सामंजस्य, समयबद्ध स्वीकृति प्रक्रिया, मिश्रित वित्तपोषण (Blended Finance) का विस्तार तथा स्मार्ट मीटरों की तीव्र स्थापना आवश्यक है। इसके साथ ही वर्चुअल पावर प्लांट (Virtual Power Plants) और इलेक्ट्रिक वाहनों (Electric Vehicles) को विद्युत ग्रिड से प्रभावी रूप से जोड़ना ऊर्जा प्रणाली को अधिक लचीला बनाएगा तथा भारत की विकेन्द्रीकृत ऊर्जा क्रांति को उसकी नीतिगत महत्वाकांक्षाओं के अनुरूप गति प्रदान करेगा।