वैश्विक खाद्य सुरक्षा पर मंडराता ‘जलवायु संकट’: कृषि प्रणालियों की अग्निपरीक्षा

तेजी से बढ़ता वैश्विक तापमान और खाद्य मांग में निरंतर वृद्धि मिलकर विश्व की कृषि-खाद्य प्रणालियों के समक्ष अभूतपूर्व चुनौती उत्पन्न कर रहे हैं। वर्ष 2025 के अब तक के तीन सर्वाधिक गर्म वर्षों में शुमार होने के बाद, खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) तथा विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की यह चेतावनी कि ‘भीषण गर्मी इन प्रणालियों को तबाही के कगार पर धकेल रही है’, अत्यंत गंभीर और व्यावहारिक विश्लेषण की मांग करती है।

व्यवधान का व्यापक स्वरूप

  • हीटवेव अब केवल अस्थायी या स्थानीय घटनाएं नहीं रह गई हैं, बल्कि वे कृषि एवं खाद्य प्रणालियों को प्रभावित करने वाले संरचनात्मक व्यवधानों का रूप ले चुकी हैं।
  • फसलों की उत्पादकता में गिरावट 30°C से अधिक तापमान पर शुरू हो जाती है। तापमान में प्रत्येक अतिरिक्त 1°C वृद्धि से मक्का के उत्पादन में लगभग 7.5% तथा गेहूं के उत्पादन में लगभग 6% की कमी आ सकती है।
  • वर्ष 2024 में विश्व के लगभग 91% महासागरों ने कम-से-कम एक समुद्री हीटवेव का अनुभव किया, जिससे मत्स्य संसाधनों पर गंभीर खतरा उत्पन्न हुआ। अरबों लोगों की आजीविका और खाद्य सुरक्षा प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से इन संसाधनों पर निर्भर है।
  • वैश्विक स्तर पर अत्यधिक गर्मी प्रतिवर्ष लगभग 0.5 ट्रिलियन कार्य-घंटों की उत्पादकता समाप्त कर रही है। इसका सबसे अधिक प्रतिकूल प्रभाव दक्षिण एशिया, उप-सहारा अफ्रीका तथा लैटिन अमेरिका की लघु एवं सीमांत कृषि अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है।

संकटों का चक्रव्यूह

  • अत्यधिक गर्मी प्रायः अकेले कार्य नहीं करती, बल्कि यह सूखे, कीट प्रकोप और सिंचाई विफलता जैसी समस्याओं को एक साथ और अधिक गंभीर बना देती है।
  • मोरक्को इसका प्रमुख उदाहरण है, जहां लगातार 6 वर्षों के सूखे के बाद आई रिकॉर्ड हीटवेव ने अनाज उत्पादन को 40% से अधिक घटा दिया।

भविष्य की राह

  • सार्थक प्रतिक्रिया के लिए तीन परस्पर अंतर्संबंधित परिवर्तन आवश्यक हैं:

1.ताप‑सहनशील फसल प्रणालियों का विकास।

2.अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जोखिम-साझाकरण तंत्रों में सुधार।

3.उच्च कार्बन उत्सर्जन वाले विकास मार्गों से निर्णायक दूरी बनाना।

  • संरचनात्मक शमन (Mitigation) पर ध्यान दिए बिना, केवल सीमित अनुकूलन उपायों (Adaptation Measures) पर निर्भर रहकर, इस संकट का समाधान संभव नहीं है। ऐसा दृष्टिकोण वस्तुतः क्रमिक अवनति को स्वीकार करने के समान होगा।
  • विश्व समुदाय को बिखरी हुई राष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं से आगे बढ़कर सामूहिक राजनीतिक इच्छाशक्ति का प्रदर्शन करना होगा। अन्यथा भविष्य में भूख और खाद्य असुरक्षा, जलवायु परिवर्तन की सबसे गंभीर और दूरगामी विरासत बन सकती है।