हरित हाइड्रोजन: भारत में स्वच्छ सार्वजनिक परिवहन का भविष्य
भारत जैसे-जैसे निम्न-कार्बन अर्थव्यवस्था (Low-carbon Economy) की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, हरित हाइड्रोजन (Green Hydrogen) सार्वजनिक परिवहन क्षेत्र के लिए एक आशाजनक वैकल्पिक ईंधन के रूप में उभर रहा है। भारत की पहली हाइड्रोजन चालित ट्रेन का शुभारंभ परिवहन क्षेत्र से होने वाले कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने तथा राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने की दिशा में देश की बढ़ती प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
अवसर
- हरित हाइड्रोजन शून्य-उत्सर्जन ईंधन का विकल्प प्रदान करता है, जिसके उपयोग से केवल जलवाष्प उत्सर्जित होती है और ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आती है।
- यह विशेष रूप से लंबी दूरी की रेल सेवाओं, बसों तथा भारी वाणिज्यिक वाहनों के लिए उपयुक्त है, जहाँ बैटरी-आधारित विद्युत प्रणालियों की चार्जिंग समय और सीमित दूरी जैसी व्यावहारिक सीमाएँ हैं।
- हाइड्रोजन आधारित परिवहन को अपनाने से भारत की आयातित जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम होगी, ऊर्जा सुरक्षा सुदृढ़ होगी तथा हाइड्रोजन उत्पादन, भंडारण, ईंधन-सेल निर्माण एवं संबद्ध उद्योगों में नए अवसर उत्पन्न होंगे।
- यह वर्ष 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन प्राप्त करने तथा सतत परिवहन (Sustainable Mobility) को बढ़ावा देने की भारत की प्रतिबद्धता को भी मजबूती प्रदान करता है।
चुनौतियाँ
- नवीकरणीय ऊर्जा तथा इलेक्ट्रोलाइज़र की उच्च लागत के कारण हरित हाइड्रोजन का उत्पादन अभी भी पारंपरिक ईंधनों की तुलना में काफी महंगा है।
- हाइड्रोजन री-फ्यूलिंग स्टेशन, भंडारण सुविधाएँ तथा परिवहन अवसंरचना विकसित करने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश की आवश्यकता होगी।
- सुरक्षा मानकों, प्रशिक्षित मानव संसाधन तथा प्रौद्योगिकी की परिपक्वता अभी विकासशील अवस्था में हैं। साथ ही, आवश्यक स्तर पर नवीकरणीय ऊर्जा की उपलब्धता भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
- बड़े पैमाने पर इसके उपयोग के लिए अत्यधिक सरकारी सब्सिडी पर निर्भर हुए बिना आर्थिक रूप से व्यवहार्य (Economically Viable) मॉडल विकसित करना आवश्यक होगा।
निष्कर्ष
भारत जहाँ एक ओर ऊर्जा सुरक्षा और दूसरी ओर जलवायु लचीलेपन (Climate Resilience) को समानांतर रूप से आगे बढ़ा रहा है, वहीं हरित हाइड्रोजन सार्वजनिक परिवहन को नई दिशा देने का एक परिवर्तनकारी अवसर प्रदान करता है। अब चुनौती केवल एक नए ईंधन को अपनाने की नहीं, बल्कि ऐसा सुदृढ़ हाइड्रोजन पारितंत्र विकसित करने की है, जो व्यापक पैमाने पर स्वच्छ, किफायती और विश्वसनीय परिवहन व्यवस्था उपलब्ध करा सके।